सफलता का रहस्य-सोचिए आपको क्या करना है क्यों करना है कैसे करना है- मोटिवेशनल आलेख
मोटिवेशन
सोचिए आपको क्या करना है
क्यों करना है कैसे करना है
जीवन में हम सभी आगे बढ़ना चाहते हैं कुछ करना चाहते हैं।अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना चाहते हैं।धन दौलत नाम शोहरत प्राप्त करना चाहते हैं किंतु इन सब की प्राप्ति के लिए हम कितना तैयार हैं?यह भी सोचना चाहिए। हम अक्सर दूसरे की नकल करने में जिंदगी का बहुमूल्य समय गंवा देते हैं।पिता अपने पुत्र से अपनी इच्छा की पूर्ति करवाना चाहता है जिससे पुत्र अपने इच्छानुसार कार्य नहीं कर पाता है । ऐसा पुत्र जिंदगीभर अपने काम से संतुष्ट नहीं हो पाता है।इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपने पुत्र को पूरी आज़ादी देनी चाहिए ताकि वह अपने अनुसार अपने कार्य क्षेत्र का चुनाव कर सके।
हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह सलमान खान, अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, सानिया मिर्ज़ा, विराट कोहली, अनिल अम्बानी,अब्दुल कलाम,ए आर रहमान, इंदिरा गांधी,नरेंद्र मोदी आदि जैसा बन जाए।किंतु ये सब बनना इतना आसान है क्या?अगर ये सब बनना इतना आसान नहीं है तो कठिन भी नहीं है क्योंकि हर व्यक्ति को अपने क्षमता के अनुसार कार्य का चुनाव करना चाहिए।जब हम अपनी क्षमता व इच्छा के अनुसार कार्य का चुनाव करेंगे तो निश्चित रूप से हमें सफलता अवश्य मिलेगी।कहने का अर्थ है कि हमें हमेशा दूसरे के नकल से बचना चाहिए।अपनी क्षमता को पहचान कर उसके अनुसार कार्य करना चाहिए।
सबसे पहले हमें ये सोचना चाहिए कि हमें करना क्या है?हम अक्सर इसी उधेर बुन में रह जाते हैं कि हमें करना क्या है? कभी कभी ऐसा होता है कि दूसरे व्यक्ति का देखकर कार्य करने लगते हैं और जब उसमें सफलता नहीं मिलती है तो उसे फिर त्याग कर दूसरा कार्य करने लगते हैं और यह सिलसिला निरंतर चलने लगता है।जिसका परिणाम होता है कि हमें जिंदगी भर सफलता नहीं मिल पाती है।इसलिए किसी भी कार्य का चुनाव करने से पहले उस पर गहन विचार विमर्श करने की जरूरत है।डॉक्टर ,इंजीनियर, बिजनेसमैन, गायक,चित्रकार,लेखक,खिलाड़ी ,पॉलिटिशियन आदि जो भी बनना चाहते हैं उसका चुनाव करने से पहले खुद से बात करें कि क्या आप ये कर पाएंगे,क्या आप जिसका चुनाव कर रहें हैं उसमें आपकी पूरी रुचि है?अगर जवाब हाँ में आता है तो अवश्य करें ।
जब आप अपने कार्य क्षेत्र का चुनाव कर लें तो जरूर स्वयं से सवाल करें कि आखिर क्यों आप ये करना चाहते हैं।इस अमुक कार्य को करने का उद्देश्य क्या है?जब आप जवाब से संतुष्ट हो जाएं यानी आपका लक्ष्य स्पष्ट हो जाए तब आप उस कार्य को करना प्रारंभ करें।ततपश्चात उस कार्य को कैसे करें उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किसी भी कार्य को कैसे करें यह महत्वपूर्ण हो जाता है।किसी भी काम को कैसे करें वाला गुण नहीं आ पाता है तो भी लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से नहीं हो पाती है।इसलिए इस गुण को भी विकसित करना चाहिए।केवल इन्हीं बातों पर ध्यान देने से ही आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेंगे मैं ऐसा भी दावा नहीं कर रहा हूँ क्योंकि सफल होने के लिए इसके अतिरिक्त अन्य कई कारण भी हो सकते हैं किंतु आपकी सफलता में ये कारक भी सहायक सिध्द होंगे।आइये एक छोटी सी कहानी से सफलता के रहस्य को जानने का प्रयास करते हैं-
एक बार सभी जानवरों में पहाड़ पर दौड़ कर चढ़ने की प्रतियोगिता आयोजित हुई।उसमें मेढ़क भी शामिल हो गया।उसे देखकर सभी जानवर हँसने लगे कि ये मेढ़क कूद कूद कर कब तक पहाड़ पर चढ़ेगा।दौड़ शुरू हुई सभी जानवर दौड़ने लगे मेढक भी फुदक फुदक कर पहाड़ पर चढ़ने लगा।सभी जानवर एक एक करके थक कर रुकने लगे किंतु मेढ़क कूद कूद कर चढ़ता रह।सभी जानवर चिल्लाने लगे कि तुम ऊपर मत चढ़ो गिर जाओगे।किंतु मेढ़क चढ़ता रहा।मेढ़क प्रतियोगिता जीत गया।जब उसे सम्मानित किया गया तो पूछा गया कि तुमको सभी लोग चिल्ला कर मना कर रहे थे कि ऊपर मत चढ़ो गिर जाओगे फिर भी चढ़ते ही रहे ऐसा क्यों? तो मेढ़क ने जवाब दिया कि मुझे ऊंचा सुनाई देता है।जब सभी जानवर चिल्ला रहे थे तो मुझे लगा कि ये लोग मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं इसलिए मैं आसानी से पहाड़ चढ़ गया।अगर मुझे सुनाई देता तो शायद मैं यह प्रतियोगिता हार जाता।
दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं तो कोई कितना भी हतोत्साहित करे उनकी बातों पर ध्यान दिए बगैर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
अमीर हमज़ा
सोचिए आपको क्या करना है
क्यों करना है कैसे करना है
जीवन में हम सभी आगे बढ़ना चाहते हैं कुछ करना चाहते हैं।अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना चाहते हैं।धन दौलत नाम शोहरत प्राप्त करना चाहते हैं किंतु इन सब की प्राप्ति के लिए हम कितना तैयार हैं?यह भी सोचना चाहिए। हम अक्सर दूसरे की नकल करने में जिंदगी का बहुमूल्य समय गंवा देते हैं।पिता अपने पुत्र से अपनी इच्छा की पूर्ति करवाना चाहता है जिससे पुत्र अपने इच्छानुसार कार्य नहीं कर पाता है । ऐसा पुत्र जिंदगीभर अपने काम से संतुष्ट नहीं हो पाता है।इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपने पुत्र को पूरी आज़ादी देनी चाहिए ताकि वह अपने अनुसार अपने कार्य क्षेत्र का चुनाव कर सके।
हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह सलमान खान, अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, सानिया मिर्ज़ा, विराट कोहली, अनिल अम्बानी,अब्दुल कलाम,ए आर रहमान, इंदिरा गांधी,नरेंद्र मोदी आदि जैसा बन जाए।किंतु ये सब बनना इतना आसान है क्या?अगर ये सब बनना इतना आसान नहीं है तो कठिन भी नहीं है क्योंकि हर व्यक्ति को अपने क्षमता के अनुसार कार्य का चुनाव करना चाहिए।जब हम अपनी क्षमता व इच्छा के अनुसार कार्य का चुनाव करेंगे तो निश्चित रूप से हमें सफलता अवश्य मिलेगी।कहने का अर्थ है कि हमें हमेशा दूसरे के नकल से बचना चाहिए।अपनी क्षमता को पहचान कर उसके अनुसार कार्य करना चाहिए।
सबसे पहले हमें ये सोचना चाहिए कि हमें करना क्या है?हम अक्सर इसी उधेर बुन में रह जाते हैं कि हमें करना क्या है? कभी कभी ऐसा होता है कि दूसरे व्यक्ति का देखकर कार्य करने लगते हैं और जब उसमें सफलता नहीं मिलती है तो उसे फिर त्याग कर दूसरा कार्य करने लगते हैं और यह सिलसिला निरंतर चलने लगता है।जिसका परिणाम होता है कि हमें जिंदगी भर सफलता नहीं मिल पाती है।इसलिए किसी भी कार्य का चुनाव करने से पहले उस पर गहन विचार विमर्श करने की जरूरत है।डॉक्टर ,इंजीनियर, बिजनेसमैन, गायक,चित्रकार,लेखक,खिलाड़ी ,पॉलिटिशियन आदि जो भी बनना चाहते हैं उसका चुनाव करने से पहले खुद से बात करें कि क्या आप ये कर पाएंगे,क्या आप जिसका चुनाव कर रहें हैं उसमें आपकी पूरी रुचि है?अगर जवाब हाँ में आता है तो अवश्य करें ।
जब आप अपने कार्य क्षेत्र का चुनाव कर लें तो जरूर स्वयं से सवाल करें कि आखिर क्यों आप ये करना चाहते हैं।इस अमुक कार्य को करने का उद्देश्य क्या है?जब आप जवाब से संतुष्ट हो जाएं यानी आपका लक्ष्य स्पष्ट हो जाए तब आप उस कार्य को करना प्रारंभ करें।ततपश्चात उस कार्य को कैसे करें उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किसी भी कार्य को कैसे करें यह महत्वपूर्ण हो जाता है।किसी भी काम को कैसे करें वाला गुण नहीं आ पाता है तो भी लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से नहीं हो पाती है।इसलिए इस गुण को भी विकसित करना चाहिए।केवल इन्हीं बातों पर ध्यान देने से ही आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेंगे मैं ऐसा भी दावा नहीं कर रहा हूँ क्योंकि सफल होने के लिए इसके अतिरिक्त अन्य कई कारण भी हो सकते हैं किंतु आपकी सफलता में ये कारक भी सहायक सिध्द होंगे।आइये एक छोटी सी कहानी से सफलता के रहस्य को जानने का प्रयास करते हैं-
एक बार सभी जानवरों में पहाड़ पर दौड़ कर चढ़ने की प्रतियोगिता आयोजित हुई।उसमें मेढ़क भी शामिल हो गया।उसे देखकर सभी जानवर हँसने लगे कि ये मेढ़क कूद कूद कर कब तक पहाड़ पर चढ़ेगा।दौड़ शुरू हुई सभी जानवर दौड़ने लगे मेढक भी फुदक फुदक कर पहाड़ पर चढ़ने लगा।सभी जानवर एक एक करके थक कर रुकने लगे किंतु मेढ़क कूद कूद कर चढ़ता रह।सभी जानवर चिल्लाने लगे कि तुम ऊपर मत चढ़ो गिर जाओगे।किंतु मेढ़क चढ़ता रहा।मेढ़क प्रतियोगिता जीत गया।जब उसे सम्मानित किया गया तो पूछा गया कि तुमको सभी लोग चिल्ला कर मना कर रहे थे कि ऊपर मत चढ़ो गिर जाओगे फिर भी चढ़ते ही रहे ऐसा क्यों? तो मेढ़क ने जवाब दिया कि मुझे ऊंचा सुनाई देता है।जब सभी जानवर चिल्ला रहे थे तो मुझे लगा कि ये लोग मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं इसलिए मैं आसानी से पहाड़ चढ़ गया।अगर मुझे सुनाई देता तो शायद मैं यह प्रतियोगिता हार जाता।
दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं तो कोई कितना भी हतोत्साहित करे उनकी बातों पर ध्यान दिए बगैर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
अमीर हमज़ा

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