कलाकार के दुखद अंत की तंग वीथिका से...…

 कलाकार के पीड़ा को महसूस करना होगा

हम कलाकारों की दुनिया में एक दूसरे के कार्यों को मुक्त कंठ से प्रशंसा करना कुछ हिचक रखने जैसा है।
आपके काम की अनदेखी,पुरस्कार में विसंगति, काम मिलने में भेदभाव ,कार्यक्रम प्रस्तुति के माध्यम,मानदेय,प्रचार इन सब बातों का बड़ा फर्क पड़ता है।मतलब हर पड़ाव पर तनाव।कुछ देने वाले,कुछ लेने वाले।
वो क्या है कि ये काम सबसे होना भी संभव नहीं है।
आदमी आदमी में फर्क होता है और ये उसकी अपनी अपनी प्रकृति ही तो है जो उसे अलग अलग सीमाओं में बांधे रखता है।
मेरा मानना है कि अगर व्यक्ति में ये सीमाएं न हो तो उसका विस्तार अनंत तक जाता है फिर वो समय की गति से परे हो जाता है। और इतना होना ही किंचित बहुत कठिन है मित्र।इसलिए वो लघु रूप में ही जीता है ।विरले होते है जो अवसर को अपने वृहत से वृहत्तर रूपों की रचना करते है।    
 ______अंकेश कुमार💝

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