50:30:20 का फार्मूला बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है



50:30:20 का फार्मूला आपके जीवन 
में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है

        हम अक्सर भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं कि हमारा भविष्य उज्ज्वल कैसे होगा, भविष्य में हमारा जीवन सुखी व सम्पन्न कैसे होगा इसके लिए प्रयास बहुत कम ही कर पाते हैं।जो लोग इसके प्रति सजग होते हैं तथा प्रयासरत रहते हैं सच में उनका आने वाला कल बेहतर होता है।हम पैसे बहुत कमाते हैं खर्च भी खुलकर करते हैं।अपने परिवार के एक एक सदस्य का खास ख्याल रखते हैं उन्हें किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते हैं।
        जब मैं एम० ए० में पढ़ रहा था तो उस समय पढ़ाया गया था कि 'one paisa save means one paisa earn' अर्थात एक पैसा बचाने का अर्थ है एक पैसा कमाना।हम कितना कमाते हैं ये महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि हम कितना बचा पाते हैं ये महत्वपूर्ण है।कोई व्यक्ति लाखों रुपये महीने का कमाने के बावजूद जब वक्त पड़ता है तो उसे दूसरे से पैसा लेना पड़ता है या फिर लोन लेना पड़ता है वहीं दूसरी तरफ एक दूसरा आदमी कम पैसा कमाने के बावजूद भविष्य के लिए पैसा बचा कर रख लेता है ताकि वक्त आने पर किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़े।
        आइये जानते हैं कैसे हम भविष्य के लिए पैसे बचा कर रख पाएंगे और इसके लिए कैसे प्लान करें ताकि वर्तमान के साथ साथ भविष्य भी बेहतर हो सके:-
        आप जितना भी एक महीना में कमाते हों उसे तीन भागों में 50:30:20 के अनुपात में बांट दें। आपकी जितनी भी आमदनी है उसका 50 प्रतिशत मूलभूत आवश्यकताओं पर खर्च करें क्योंकि जो मौलिक जरूरतें होती हैं उसमें कटौती नहीं किया जा सकता है।आमदनी का 30 प्रतिशत आप अपने और अपने परिवार के शौक को पूरा करने पर खर्च करें बस इस बात का हमेशा ध्यान रहे कि केवल 30 प्रतिशत में ही शौक पूरा करने के वस्तु पर खर्च करना है। बाकी के 20 प्रतिशत आपको अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रखना है।लेकिन यह काम आपको लगातार करना होगा तभी आप अच्छा खासा अमाउंट जमा कर पाएंगे।उस 20 प्रतिशत राशि को आप सेविंग एकाउंट में रख सकते हैं या म्यूच्यूअल फण्ड में लगा सकते हैं या फिर अन्य किसी माध्यम से अपने पैसे को बचा और बढ़ा सकते हैं।कहा भी जाता है कि 'पैसे से पैसा कमाओ'।
        दो दोस्त थे राकेश और आनंद।राकेश अच्छी कंपनी में नौकरी करता था।महीने का 80 हजार रु सैलरी थी जबकि आनंद एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक था जिसे मात्र 25 हजार रु मिलता था।राकेश दिल खोल कर खर्च करता था महीने का अंतिम सप्ताह आते आते राकेश का हाथ खाली हो जाता था फिर एक सप्ताह उधार लेने का खेल चलता था जबकि आनंद को कभी किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ी। समय निकलता गया।राकेश की बेटी की शादी करनी थी तो उसे पर्सनल लोन लेना पड़ा।जब आनंद को अपनी बेटी की शादी करनी पड़ी तो उसे एक रु भी कहीं से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ी।राकेश अपने मित्र आनंद से जानना चाहा कि इतने कम सैलरी में इतना शानदार तरीके से बिना किसी से कर्ज लिए शादी कैसे किया? जब आनंद इसका रहस्य बताया तो राकेश सुनकर दंग रह गया।आनंद ने कहा कि जितना भी सैलरी आता है उसमें से मैं हर महीने 500रु म्यूच्यूअल फण्ड में लगा देता था जिससे बेटी की शादी के समय अच्छी राशि जमा हो गई और शादी करने में कोई प्रॉब्लम नहीं हुई।
        अतः अगर हम भी एक प्लान के तहत कहीं एसआईपी करते रहेंगे तो भविष्य में कभी भी पैसे की कोई समस्या नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर किसी के सामने हाथ फैलाने अर्थात कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी।।
        अमीर हमज़ा
        
        

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